CGPSC मुख्य परीक्षा हेतु उत्तर लेखन अभ्यास मॉडल उत्तर के साथ

CGPSC मुख्य परीक्षा हेतु उत्तर लेखन अभ्यास मॉडल उत्तर के साथ


प्रश्न :राष्ट्रपति शासन क्या है ? भारतीय राजव्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका को रेखांकित करते हुए न्यायपालिका के हालिया निर्णयों पर प्रकाश डालिए । 250 शब्द

संभावित मॉडल उत्तर:


राष्ट्रपति शासन

जब राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है.अर्थात राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता (अनुच्छेद 356) या यदि राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा दिये गये संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती है (अनुच्छेद 365) या जब किसी राज्य विधानसभा में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं हो.उपरोक्त तीनो ही परिस्थितियों के आधार पर राष्ट्रपति उस राज्य सरकार को भंग या निलंबित कर उसे प्रत्यक्ष संघीय शासन के अधीन लेने अनुमति प्रदान करते हैं जिसे राष्ट्रपति शासन (या केन्द्रीय शासन) कहते हैं .

राज्यपाल की भूमिका

  • भारतीय संविधान में राज्यों में भी संसदीय शासन प्रणाली का प्रावधान है , साथ ही साथ राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करते हुए सहकारी संघ के अनुरूप राज्यों पर केंद्र का कुछ विशेष नियंत्रण भी स्थापित किया गया है .
    उपरोक्त संवैधानिक मूल भावना के अनुरूप राज्यपाल जहां एक ओर राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है तो वहीं दूसरी ओर वह केंद्र का भी प्रतिनिधि होता है.

अपने कर्तव्यों की पूर्ति के सम्बन्ध में राज्यपाल को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करने के अलावा विशेष विवेकाधिकार भी हासिल हैं जिससे उनकी भूमिका को निम्न बिन्दुओं के आधार पर देखा जा सकता है –

1. राज्य के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते सभी कार्यपालकीय शक्तियां राज्यपाल में निहित होते हैं (अनुच्छेद 166)
2.राज्यपाल न केवल बहुतमत प्राप्त दल से मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है बल्कि उसकी सलाह पर राज्य की मंत्रिपरिषद के अन्य मंत्रियों की भी नियुक्ति करता है।(अनुच्छेद 164)
3.किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं होने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन हेतु सिफारिश करता है
4.राज्य के विधानमंडल के सत्र को बुलाने और समाप्त करने का अधिकार होता है। वह राज्य के मंत्रिपरिषद की सलाह पर राज्य विधान सभा को भंग कर सकता है।
5.विधानमंडल के द्वारा पारित किसी भी बिल को क़ानून बनने के लिए राज्यपाल की सहमति जरूरी होती है
6.राज्य का विधानमंडल सत्र में नहीं है तब अध्यादेश जारी करने की शक्ति होती है।(अनुच्छेद 213)
7.नियुक्तियों सम्बन्धी शक्ति के आधार पर राज्यपाल विधानमंडल में 1 आंग्ल भारतीय ,राज्यपाल विधान परिषद् की कुल सदस्य संख्या के लगभग 1/6 सदस्यों को नामित करने के अलावा राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) और राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को भी नियुक्त करता है
8.राज्यपाल की पूर्व-अनुमति के बिना धन विधेयक को राज्य की विधान सभा में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
राज्य के विधानमंडल में वार्षिक और पूरक बजट राज्यपाल के नाम से ही प्रस्तुत किये जाते हैं।
9.राज्य की कार्यपालिका शक्ति से सम्बंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध करने वाले किसी व्यक्ति को प्राप्त दंड को राज्यपाल क्षमा/कम/स्थगित कर सकता है
10.राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं

राज्यपाल द्वारा उपरोक्त भूमिकाओं के निर्वहन में शक्तियों के दुरुपयोग के अनेक आरोप लगे हैं अतः उसकी नियुक्ति ,पद के औचित्य एवं भूमिका पर उठते सवालों के निर्णयन के अलोक में न्यापालिका वर्णित बिन्दुओं को पूंछी आयोग ,सरकारिया आयोग एवं बोम्मई मामले 1994 के परिप्रेक्ष्य में निम्न प्रकार से उल्लेखित किया जा सकता है –

राज्यपाल के नियुक्ति पर दिशानिर्देश

  • राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष निश्चित करने,
  • उसके हटाये जाने के लिए राज्य विधानसभा द्वारा महाभियोग चलाए जाने जैसी संस्तुतियां शामिल थीं।
  • उनके चयन में राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की जानी चाहिए।
  • राज्यपाल को किसी मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आदेश देने का भी हक होना चाहिए।
  • राज्यपालों को विश्वविद्यालयों का चांसलर नहीं बनाया जाना चाहिए।
  • राज्यपाल ऐसे व्यक्ति को बनाया जाना चाहिए जिसने पिछले दो वर्र्षों से सक्रिय राजनीति में भाग न लिया हो।

विवेकाधिकार शक्ति की समीक्षा के सम्बन्ध में

  • राज्यपाल विधान सभा मे बहुमत की स्थिति पर सरकार को भंग नहीं कर सकता है।
  • अपना पद छोडने के बाद राज्यपाल को केंद्र या राज्य सरकार में लाभ का कोई पद नहीं दिया जाना चाहिए।
  • विशेष रूप से राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी किया गया जिसमे –
  • किन परिस्थितियों में राष्ट्रपति शासन लगाना उचित है ,कब अनुचित है तथा इसमें न्यायपालिका के भूमिका को रेखांकित किया गया

इस तरह न्यायपालिका ने भारतीय संघीय प्रणाली में राज्यों की भूमिका एवं देश की एक एकता अखंडता के बीच संतुलन रखते हुए राज्यपाल पर शक्तियों के दुरुपयोग एवं अन्य मुद्दों को सम्बोधित करते हुए अनेक सुधारात्मक दिशानिर्देश जारी किये हैं जिन्हें लागू करते हुए इस महत्पूर्ण संवैधानिक पद एवं सविधान की संघीय भावना के बीच संतुलन की आवश्यकता है .


सन्दर्भ
अनुच्छेद 356 एवं 365
भारत की राजव्यवस्था – M लक्ष्मीकांत
https://satyagrah.scroll.in/article/100500/president-s-rule-simplified
https://plus.google.com/100388247206310931293/posts/TwNVoAsacKb
https://hi.wikipedia.org/wiki/राष्ट्रपति_शासन

सफलता के लिए अभ्यास अनिवार्य घटक है एवं गलतियों को सुधारते हुए निरंतर अभ्यास एक मात्र मंजिल पाने का रास्ता है अतः हम उत्तर लिखने वाले अभ्यर्थी को बधाई देते हैं की उन्होंने उत्तर लिखने प्रयास किया एवं गलतियों को सुधारकर स्वयं को और भी निखारने  के लिए  आगे आए

उनके द्वारा लिखा हुआ उत्तर नीचे दी जा रही है उसके पश्चात् उसका मूल्यांकन एवं उचित टिप्पणी दी गई है जिससे आप भी एक बेहतर उत्तर लिख सके –



अगर उत्तर का फोटो लोड नहीं होता है लिंक part1 part2

  • मूल्यांकन :

250 शब्द अर्थात 20 अंक वाले प्रश्न का भाग होगा

राष्ट्रपति शासन (2 अंक )

  • आपको राष्ट्रपति शासन क्या है ? इसे सही एवं सरल तथा कम शब्दों में बताना चाहिए अतिरिक्त चीजें लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है
  • आपने लिखा है प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप वैगरह से भी राष्ट्रपति शासन लग सकता है इससे परीक्षक आपके बारे में गलत धारणा बना सकते हैं और 
  • इसका प्रभाव आपके दुसरे सही उत्तरों पर भी पड़ सकता है इसलिए हमेशा गलत उत्तर लिखने से बचें ,
  • या तो आप ऐसा सीधा लिखते कि  – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 ,365 एवं त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में राष्ट्रपति विधानमंडल को निलंबित या भंग कर राज्य में केन्द्रीय शासन लागु करते हैं जो राष्ट्रपति शासन कहलाता है 
  • या अनुच्छेद याद नहीं तो उसकी जगह उनके प्रावधान का उल्लेख करते हुए इसी बात को लिख देते जैसे -किसी भी राज्य में  संवैधानिक तंत्र की विफलता  ,केंद्र सरकार द्वारा दिये गये संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करने  या   त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में राष्ट्रपति विधानमंडल को निलंबित या भंग कर राज्य में केन्द्रीय शासन लागु करते हैं जो राष्ट्रपति शासन कहलाता है
  • ऐसा छोटा एवं सही चीज लिख देना पर्याप्त है ,भावनाओं में बहकर 2-3 लाइन अतिरिक्त चीजें लिख भी देते हैं तो वह सही भी होना चाहिए और समय प्रबंधन की चुनौती भी हो सकती सभी उत्तरों में इसी तरह थोडा -थोडा अनावश्यक लिखते गए तो
  • आपने मुलअधिकार पर प्रभाव को भी उल्लेखित करने का प्रयास किया है एवं “जीने के लिए अधिकार” को भी जोड़ा है अनुच्छेद 21 ,
  • सर्वप्रथम तो आपको राष्ट्रपति शासन का प्रभाव पूछा ही नहीं गया है अतः लिखने की आवश्यकता ही नहीं है ,फिर अगर आपको भरोसा है की यह लिखते हुए भी आप अन्य सभी प्रश्नों के उत्तर लिख सकते हैं तो अनुच्छेद 358 और 359 पढ़िए(लक्ष्मीकांत से ही पढ़ लीजिये) फिर उत्तर को दोबारा चेक कीजिये पुनः क्या आपने सही लिखा है ?

राज्यपाल की भूमिका एवं इस पर न्यायपालिका के निर्णय ( 9 + 9  )अंक

  • राज्यपाल के विभिन्न भूमिकाओं को लिखिए – क्रमसे मत्वपूर्ण भूमिका सबसे पहले फिर उससे कम इस तरह
  • जुड़ाव वाक्य का प्रयोग जैसे – “उपरोक्त भूमिकाओं के निर्वहन में राज्यपाल द्वारा शक्तियों के दूरुपयोग तथा राज्यपाल का एक राजनितिक साधन के रूप में उपयोग से सम्बंधित विवादों के निर्णयन में न्यायपालिका द्वारा निम्न दिशानिर्देश समय समय पर जारी किये गए -:
  • न्यायपालिका के निर्णय के विभिन्न बिंदु को लिखें ऊपर लिखे भूमिका के अनुसार क्रम में रहता है तो उत्तर संरचना भी सुन्दर लगेगा 
  • आशावादी सुधारात्मक और व्यवहारिक निष्कर्ष भी लिख सकते हैं
  • आपने तो केवल एक ही आयाम को खिंच दिया है राम कथा की तरह ,शुक्र है इसलिए येदुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा नहीं लिख दिए 😆 “
  • आपको इस तरह राजनितिक कहानी नहीं लिखनी है ,उत्तर को लिखते समय प्रश्न को ध्यान रखें ,और केवल वही लिखें जो पूछा गया है न उससे कम न उससे ज्यादा 
  • उत्तर में सम्बंधित प्रश्न से ज्यादा से ज्यादा आयाम को शामिल करने का प्रयास करें ,किसी भी आयाम को अनावश्यक विस्तार न दें
  • निष्कर्ष या परिचय में भी अनावश्यक शब्दों को शामिल न करें ,जैसे परिचय में आपने लिखा है “राष्ट्रपति शासन एक ऐसी स्थति है “एवं निष्कर्ष में “इस प्रकार देखते हैं कि ” ऐसे शब्दों के दोहराव से बचें और सीधे ही मूल बात को लिखने का प्रयास करें
  • अगर जल्दी लिख पाते हैं तो बेहतर साहित्यिक सरल शब्द का उपयोग करें जिससे समापन एवं आरम्भ दोनों आकर्षक लगे ,नहीं तो सीधे ही मूल बात को साधारण शब्द में लिख उतना पर्याप्त होता है
  • आपको बहुत सारे उत्तर लिखने हैं अतः निष्कर्ष या परिचय में  अनावश्यक कलाकारी करने का भी प्रयास न करें उतना समय नहीं होता

अंक -0.5 +2 +0.5

> आपने subheading देने का प्रयास किया वह अच्छा  प्रयास है ,आपका उत्तर लिखना सराहनीय है ,अभ्यास से सभी चीजें सुधर जाएंगी ,निरंतर प्रयासरत रहें 

उत्तर को  मिला अंक है -3/20

आप भी पुनः मूल्यांकन करे प्रश्न को ध्यान में रखकर तथा कमेंट बॉक्स में अंक प्रदान करें