RPS-2020 CGPSC MAINS WRITING PRACTICE 15 MAY ANSWER

RPS-2020 CGPSC MAINS WRITING PRACTICE 15 MAY ANSWER


उत्तर1 –
समाज व समिति में अंतर-
1) समाज समिति से पुराना है
2) समाज का उद्देश्य सामान्य है जबकि समिति का विशेष
3) समाज संगठित- असंगठित हो सकता है जबकि समिति का संगठित होने आवश्यक होता है।
4) समाज मे सहयोग व संघर्ष दोनों होता है जबकि समिति में केवल सहयोग होता है।
5) समाज स्वाभाविक है समिति कृत्रिम है।
6) समाज सम्बन्धो पर बल देता है जबकि समिति समूहवाद पर।


उत्तर 2– बोगार्डस के अनुसार “संस्था समाज का वह ढांचा होता है जो सुव्यवस्थित विधियों द्वारा लोगो की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संगठित होता है। संस्था को कार्य करने का समाज द्वारा मान्यता प्राप्त निश्चित ढंग भी कहा जा सकता है।


उत्तर 3– समिति व संस्था में अंतर-  1)समिति का मानवीय पक्ष होता है, संस्था का नही।
2) समिति का आकार होता है इसलिये वह मूर्त है, संस्था का कोई आकर नही है।
3) समिति वस्तुयें है जबकि संस्था विधियां है।


उत्तर4-
सामान्य अर्थो में जनरीति समाज द्वारा अपनायी गयी रीति है। यह समूह के आदत के रूप में भी अर्थ स्प्ष्ट करता है।
गिलीन व गिलीन के अनुसार- जनरीति दैनिक जीवन के वे प्रतिमान है जो किसी समूह में अनियोजित और अचेतन रुप से विकसित होता है। जनरीति की विशेषता-
1) जनरीति स्वतः उत्पन्न होती है, अलिखित और स्वीकृति प्राप्त है।
2) यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होता है।
3) यह मानव व्यवहार को नियंत्रित करता है, एकरूपता लाती है।
4) एक समाज के जनरीति दूसरे समाज से भिन्न होता है।
5) इसके पालन के लिए कोई औपचारिक संगठन नही है, वरन अनौपचारिक साधन- मजाक, व्यंग्य आलोचना इसके पीछे होता है।
इसका महत्व-
जनरीति का जीवन मे बहुत महत्व है। यह हमको सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण में रहने की कला सीखाती है। यह समाज का अंग है समाज इसके बिना अस्तित्वहीन है। यह मानव समाज को नियंत्रित करता है, मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करती है, तथा व्यकितत्व का निर्माण करती है। कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन कर खुद को समाज से अलग पाता है।
अतः जनरीति समाज मे अनुशासन और सुरक्षा लाती है।


उत्तर5– जनरीति और लोकाचार में अंतर-
1) साधारणतः जनरीति सामाजिक जीवन के व्यवहार के सामान्य नियम होते है। जबकि लोकाचार व्यवहार के उन तरीको का प्रतिनिधित्व करती है जो अधिक सुस्पष्ट और अत्यधिक आवश्यक माने जाते है।
2) जनरीति लोकाचार की अपेक्षा कम स्वीकृति प्राप्त होते है किन्तु लोकाचार की अपेक्षा अधिक चेतन होता है लेकिन लोकाचार जनरीति की अपेक्षा अधिक स्वीकृति प्राप्त लिए होते है किन्त जनरीति की अपेक्षा कम चेतन होता है।
3)सामान्यतः जनरीति की प्रकृति वैयक्तिक होता है। अतः इनका पालन करने के पीछे वैयक्तिक स्वार्थ जुड़े होते है तथा इनका उल्लंघन करने पर वैयक्तिक स्तर पर हानि होती है
जबकि लोकाचार की प्रकृति सामूहिक होता है क्योंकि इनका पालन सामूहिक कल्याण हेतु आवश्यक माना जाता है तथा इनके उल्लंघन पर सम्पूर्ण समूह को हानि होता है।
4) जनरीति जब समाज मे पुराना हो जाती है और उपयोगी बनी रहती है तो वह लोकाचार का रूप धारण कर लेती है
किन्तु लोकाचार कितना भी पुराना क्यों न हो जाये वह कभी जनरीति नही बन सकता।


click here for all question