CGPSC राज्य सेवा परीक्षा(SSE) : एक परिचय एवं परीक्षा प्रारूप

CGPSC राज्य सेवा परीक्षा(SSE): एक परिचय

छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC), जो राज्य में  एक संवैधानिक निकाय है, Deputy Collector-उप जिलाध्यक्ष (राज्य सिविल सेवा) और  Dy. Superintendent of Police-उप पुलिस अधीक्षक(राज्य पुलिस सेवा) जैसी राज्य सिविल सेवाओं तथा लेखा अधिकारी (राज्य वित्त सेवा), खाद्य अधिकारी/सहायक संचालक-Assistant Director  (खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ), सहायक संचालक-Assistant Director (महिला एवं बाल विकास विभाग )  ,सहायक संचालक-Assistant Director (अजा/अजजा कल्याण विभाग) एवं नायब तहसीलदार आदि जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं हेतु अभ्यर्थियों का चयन करने के लिये प्रत्येक वर्ष राज्य सेवा परीक्षा आयोजित करता है। प्रत्येक वर्ष लाखों अभ्यर्थी अपना भाग्य आज़माने के लिये इस परीक्षा में बैठते हैं। तथापि, उनमें से चंद अभ्यर्थियों को ही “राज्य  के वास्तुकार” (Architect of State) की संज्ञा से विभूषित इन प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचने का सौभाग्य प्राप्त होता है। ‘राज्य सेवा परीक्षा’ मुख्यत: तीन चरणों (प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार) में सम्पन्न की जाती है जिनका सामान्य परिचय इस प्रकार है-

प्रारंभिक परीक्षा:

  • राज्य सेवा परीक्षा का प्रथम चरण प्रारंभिक परीक्षा ( Preliminary Examination) कहलाता है। इसकी प्रकृति पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।
  • प्रश्न से सम्बंधित आपके चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दी गई ओएमआर सीट में प्रश्न के सम्मुख दिये गए संबंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।
  • राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 200 अंकों की होती है।
  • वर्तमान में प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नपत्र शामिल हैं। पहला प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ (100 प्रश्न, 200 अंक) का है, जबकि दूसरे को ‘योग्यता  परीक्षा’ ( Aptitude Test) या ‘सीसैट’ (100 प्रश्न, 200 अंक) का होता है और यह क्वालीफाइंग पेपर के रूप में है। सीसैट प्रश्नपत्र में अनारक्षित श्रेणी अभ्यर्थी के लिए  33% अंक  आरक्षित श्रेणी अभ्यर्थी के लिए 23% अंक प्राप्त करने आवश्यक हैं।
  • दोनों प्रश्नपत्रों में ‘निगेटिव मार्किंग की व्यवस्था लागू है जिसके तहत 3 उत्तर गलत होने पर 1 सही उत्तर के बराबर अंक काट लिये जाते हैं। अर्थात एक गलत उत्तर के लिए 0.33 ऋणात्मक अंक का प्रावधान होता है ।
  • प्रारंभिक परीक्षा में कट-ऑफ का निर्धारण सिर्फ प्रथम प्रश्नपत्र यानी सामान्य अध्ययन के आधार पर किया जाता है।

मुख्य परीक्षा: 

  •  राज्य  सेवा परीक्षा का दूसरा चरण ‘मुख्य परीक्षा( Mains Examination) कहलाता है।
  • प्रारंभिक परीक्षा का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि सभी उम्मीदवारों में से कुछ गंभीर व योग्य उम्मीदवारों को चुन लिया जाए तथा वास्तविक परीक्षा उन चुने हुए उम्मीदवारों के बीच आयोजित कराई जाए।
  • मुख्य परीक्षा कुल 1400 अंकों की है जिसमें 1000 अंक सामान्य अध्ययन के लिये (200-200 अंकों के 5 प्रश्नपत्र)200 अंक एक भाषा पेपर  के लिये  तथा 200 अंक निबंध के लिये निर्धारित हैं।
  • मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं में साथ-साथ प्रकाशित किये जाते हैं, हालाँकि उम्मीदवारों को दोनों में से किसी भी परन्तु केवल एक ही भाषा में उत्तर देने की छूट होती है ,अंशतः या मिश्रित भाषा की अनुमति नहीं दी जाती है  (केवल भाषा पेपर  में यह छूट है कि उम्मीदवार उसी भाषा की लिपि में उत्तर लिखे है, चाहे उसका माध्यम वह भाषा न हो ,मतलब हिंदी का उत्तर हिंदी में ,अंग्रेजी का अंग्रेजी तथा छत्तीसगढ़ी के उत्तर केवल छत्तीसगढ़ी में देना होता है )।
  • गौरतलब है कि जहाँ प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (Objective) होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में अलग-अलग शब्द सीमा वाले वर्णनात्मक (Descriptive) या व्यक्तिनिष्ठ (Subjective) प्रश्न पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों में विभिन्न विकल्पों में से उत्तर चुनना नहीं होता बल्कि अपने शब्दों में लिखना होता है। यही कारण है कि मुख्य परीक्षा में सफल होने के लिये अच्छी लेखन शैली बहुत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

साक्षात्कार: 

  • राज्य  सेवा परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण साक्षात्कार (Interview) कहलाता है।
  • मुख्य परीक्षा मे चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: दिसम्बर -जनवरी  माह में आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
  • इसमें न तो प्रारंभिक परीक्षा की तरह सही उत्तर के लिये विकल्प दिये जाते हैं और न ही मुख्य परीक्षा के कुछ प्रश्नपत्रों की तरह अपनी सुविधा से प्रश्नों के चयन की सुविधा होती है। हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य होता है और हर उत्तर पर आपसे प्रतिप्रश्न भी पूछे जा सकते हैं। हर गलत या हल्का उत्तर ‘नैगेटिव मार्किंग’ जैसा नुकसान करता है और इससे भी मुश्किल बात यह कि परीक्षा के पहले दो चरणों के विपरीत इसके लिये कोई निश्चित पाठ्यक्रम भी नहीं है। दरअसल, यह परीक्षा अपनी प्रकृति में ही ऐसी है कि उम्मीदवार का बेचैन होना स्वाभाविक तो है परन्तु अच्छे अभ्यास और तैयारी के परिणामस्वरूप  सबसे आसान और आरामदायक भी हो सकता है ।
  • CGPSC द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के लिये कुल 150 अंक निर्धारित किये गए हैं। मुख्य परीक्षा के अंकों (1400 अंक) की तुलना में इस चरण के लिये निर्धारित अंक कम अवश्य हैं लेकिन अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इन अंकों का विशेष योगदान होता है।
  • इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग में निर्धारित स्थान पर इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों द्वारा मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से ही  देना होता है। यह प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार सामान्यत: 40-50 दिनों तक चलती है।
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है।
  • इस चरण के लिये चयनित सभी अभ्यर्थियों का इंटरव्यू समाप्त होने के तुरंत बाद सामान्यतः  उसी दिन शाम तक अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।

राज्य  सेवा परीक्षा (SSE): परीक्षा का प्रारूप

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा का प्रारूप इस प्रकार है –

परीक्षा परीक्षा आयोजन का माह  (सामान्यत:)विषय कुल अंक 
*1  प्रारंभिक फ़रवरीसामान्य अध्ययन  प्रश्नपत्र  I & IIप्रश्नपत्र  I – 200

प्रश्नपत्र  II – 200

मुख्य जूनभाषा पेपर

निबंध लेखन

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –I)

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –II)

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –III)

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –IV)

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –V)

200

200

200

200

200

200

200

साक्षात्कार दिसम्बर-जनवरीव्यक्तित्व परीक्षण150

 

नोट:

  • *1 प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त किये गये अंकों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।
  • उम्मीदवार का अंतिम चयन मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गये अंकों के योग के आधार पर होता है।