🌿 Chhattisgarh Tribes in Hindi — छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ (CGPSC स्पेशल नोट्स)
Chhattisgarh Tribes in Hindi — छत्तीसगढ़ को ‘जनजातियों की भूमि’ कहा जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या का 30.62% भाग अनुसूचित जनजाति (ST) का है। CGPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा तथा CG व्यापम की सभी परीक्षाओं में जनजाति विषय से 4 से 6 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं।
- 🌿 Chhattisgarh Tribes in Hindi — छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ (CGPSC स्पेशल नोट्स)
- 📊 छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सांख्यिकी एक नज़र में
- ⭐ विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG in Chhattisgarh)
- 🏠 प्रमुख जनजातियाँ और उनके युवागृह (Youth Dormitories)
- 💍 छत्तीसगढ़ की जनजातीय विवाह पद्धतियाँ (Tribal Marriages)
- 💃 प्रमुख जनजातीय लोकनृत्य (Tribal Dances)
- 🎯 CGPSC Pattern MCQ Practice Set — जनजातियाँ
- 📝 One-Liner Revision Points for CGPSC
📌 इस पोस्ट में छत्तीसगढ़ की सभी 42 जनजातियों के महत्वपूर्ण तथ्य, 7 विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG), युवागृह, विवाह परंपराएं और परीक्षा उपयोगी 10 MCQs शामिल हैं।
📊 छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ — सांख्यिकी एक नज़र में
| बिंदु / सूचक | तथ्य (2011 जनगणना) |
|---|---|
| कुल जनजातीय जनसंख्या प्रतिशत | 30.62% (कुल जनसंख्या का) |
| राज्य में मान्यता प्राप्त जनजातियाँ | 42 जनजातियाँ (161 उप-समूह) |
| सर्वाधिक जनजाति प्रतिशत वाला जिला | सुकमा (लगभग 83.4%) / बीजापुर |
| न्यूनतम जनजाति प्रतिशत वाला जिला | बेमेतरा (लगभग 4.7%) / रायपुर |
| सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला जिला | जशपुर |
| सबसे बड़ा जनजातीय समूह | गोंड (Gond) — कुल ST आबादी का ~56% |
| सबसे साक्षर जनजाति | उरांव (Oraon) एवं हल्बा |
| आर्थिक दृष्टि से सबसे समृद्ध जनजाति | हल्बा (Halba) |
⭐ विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG in Chhattisgarh)
छत्तीसगढ़ में कुल 7 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) चिन्हित हैं:
1. केंद्र सरकार द्वारा घोषित 5 जनजातियाँ:
- अबूझमाड़िया (Abujhmaria): नारायणपुर (अबूझमाड़ क्षेत्र) — स्थानांतरित कृषि को ‘पेद्दा’ कहते हैं।
- बैगा (Baiga): कबीरधाम, बिलासपुर — ‘गोंडों के पुरोहित’, स्थानांतरित कृषि ‘बेवार’, सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति।
- बिरहोर (Birhor): रायगढ़, जशपुर — ‘बिरहोर’ का अर्थ ‘जंगल का आदमी’, रस्सी बनाने में निपुण।
- पहाड़ी कोरवा (Pahari Korwa): कोरबा, जशपुर, बलरामपुर — स्थानांतरित कृषि ‘देवारी’, पेय ‘हंडिया’।
- कमार (Kamar): गरियाबंद (बिंद्रानवागढ़), धमतरी — बाँस शिल्प में सिद्धहस्त, घोड़ा छूना सामाजिक रूप से वर्जित।
2. राज्य सरकार द्वारा घोषित 2 जनजातियाँ:
- पंडो (Pando): सूरजपुर, सरगुजा (स्वयं को पांडवों का वंशज मानते हैं)।
- भुंजिया (Bhunjia): गरियाबंद (रसोई घर को ‘लाल बंगला’ कहते हैं, रोगों का इलाज तप्त लोहे से दागकर करते हैं)।
🏠 प्रमुख जनजातियाँ और उनके युवागृह (Youth Dormitories)
जनजातीय समाज में युवागृह युवाओं को सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक शिक्षा देने का केंद्र होते हैं:
| जनजाति | युवागृह का नाम | प्रमुख विशेषताएं |
|---|---|---|
| मुरिया (Muria) | घोटुल (Ghotul) | पुरुष सदस्य: चेलिक (प्रमुख: सिरेदार), महिला सदस्य: मोटियारी (प्रमुख: बेलोसा)। प्रमुख देवता: लिंगोपेन। |
| उरांव (Oraon) | धूमकुरिया (Dhumkuria) | पुरुष खंड: जोंख एरपा (मुखिया: धांगर महतो), महिला खंड: पेल एरपा। |
| बिरहोर (Birhor) | गीतिओना (Gitiona) | पारंपरिक शिक्षण एवं सामाजिक मिलन स्थल। |
| भुइयां (Bhuiyan) | रंगभंग (Rangbhang) | उत्तरी छत्तीसगढ़ में प्रचलित। |
💍 छत्तीसगढ़ की जनजातीय विवाह पद्धतियाँ (Tribal Marriages)
- क्रय विवाह (पारिंगधन): वधूमूल्य देकर विवाह करना (अधिकांश जनजातियों में प्रचलित)।
- सेवा विवाह (लमसेना / चरघिया): वर द्वारा वधूमूल्य चुकाने के बदले ससुर के घर सेवा देना (गोंड, बैगा)।
- अपहरण विवाह (पायसोतुर): युवती की सहमति या बलपूर्वक भगाकर विवाह (गोंड जनजाति)।
- हठ विवाह (ढुकू / पैठू): युवती द्वारा अपनी पसंद के लड़के के घर जबरन जाकर रहना (बैगा, कोरवा)।
- विनिमय विवाह (गुरावट): दो परिवारों के बीच भाई-बहन की अदला-बदली विवाह।
- तीर विवाह: बिंझवार जनजाति में यदि कन्या के लिए उपयुक्त वर न मिले, तो तीर के साथ प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है।
- भगेली विवाह: वर-वधू की सहमति से भागकर किया जाने वाला विवाह।
💃 प्रमुख जनजातीय लोकनृत्य (Tribal Dances)
| नृत्य का नाम | संबंधित जनजाति | अवसर / विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| गौर नृत्य (Bison Horn) | दण्डामी माड़िया | भैंस के सींग का मुकुट पहनकर किया जाता है। वेरियर एल्विन ने इसे संसार का सबसे सुंदर नृत्य कहा। |
| कर्मा नृत्य (Karma) | बैगा, उरांव, गोंड | कर्म देवता को प्रसन्न करने हेतु, वर्षा ऋतु की समाप्ति से वसंत तक। |
| ककसार (Kaksar) | मुरिया / अबूझमाड़िया | ककसार देव (फसल देवता) की पूजा के अवसर पर जीवनसाथी के चुनाव हेतु। |
| सरहुल (Sarhul) | उरांव | साल (सखुआ) वृक्ष में फूल आने पर चैत्र पूर्णिमा को। |
| सुआ नृत्य (Suwa) | गौड़ / कमार महिलाएं | दीपावली के अवसर पर, तोते के प्रतीक के रूप में। |
| परब नृत्य (Parab) | धुरवा | सैन्य नृत्य जिसमें नर्तक पिरामिड बनाते हैं। |
🎯 CGPSC Pattern MCQ Practice Set — जनजातियाँ
Q1. ‘वेरियर एल्विन’ ने किस जनजातीय नृत्य को ‘विश्व का सबसे सुंदर नृत्य’ कहा था?
(A) कर्मा नृत्य
(B) गौर नृत्य (दण्डामी माड़िया) ✅
(C) ककसार नृत्य
(D) सरहुल नृत्य
Q2. मुरिया जनजाति के पारंपरिक युवागृह ‘घोटुल’ के पुरुष प्रमुख को क्या कहा जाता है?
(A) बेलोसा
(B) धांगर
(C) सिरेदार ✅
(D) कोटवार
(व्याख्या: घोटुल में पुरुष सदस्यों को चेलिक और प्रमुख को ‘सिरेदार’ कहा जाता है; महिला प्रमुख ‘बेलोसा’ कहलाती है।)
Q3. छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) की कुल संख्या कितनी है?
(A) 4
(B) 5 ✅
(C) 7
(D) 9
(व्याख्या: केंद्र सरकार द्वारा 5 (अबूझमाड़िया, बैगा, बिरहोर, पहाड़ी कोरवा, कमार) और राज्य सरकार द्वारा 2 (पंडो, भुंजिया) घोषित हैं। कुल 7 हैं।)
Q4. किस जनजाति में रसोई घर को पवित्र मानकर ‘लाल बंगला’ कहा जाता है?
(A) बैगा
(B) कमार
(C) भुंजिया ✅
(D) बिंझवार
Q5. ‘तीर विवाह’ किस जनजाति की एक विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा है?
(A) बिंझवार ✅
(B) हल्बा
(C) उरांव
(D) भतरा
(व्याख्या: अमर शहीद वीर नारायण सिंह बिंझवार जनजाति से थे; इस जनजाति में तीर विवाह की परंपरा है।)
Q6. ‘धूमकुरिया’ किस जनजाति का पारंपरिक युवागृह है?
(A) मुरिया
(B) उरांव ✅
(C) गोंड
(D) कोरवा
Q7. स्थानांतरित कृषि ‘बेवार’ (Bewar) मुख्य रूप से किस जनजाति द्वारा की जाती है?
(A) कमार
(B) बैगा ✅
(C) हल्बा
(D) भतरा
Q8. छत्तीसगढ़ राज्य की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रतिशत 2011 जनगणना अनुसार कितना है?
(A) 25.12%
(B) 30.62% ✅
(C) 32.40%
(D) 34.50%
📝 One-Liner Revision Points for CGPSC
- छत्तीसगढ़ में कुल 42 जनजातियाँ और 161 उपजातियाँ अधिसूचित हैं।
- वीर नारायण सिंह — बिंझवार जनजाति के गौरव और छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी।
- गुंडाधूर — 1910 के प्रसिद्ध भूमकाल विद्रोह के जननायक (धुरवा जनजाति)।
- गोंडों के प्रमुख देवता: बूढ़ादेव, दूल्हादेव, बड़ादेव।
- सरहुल पर्व: उरांव जनजाति द्वारा साल के फूल खिलने पर सूर्य और धरती के विवाह के प्रतीक रूप में मनाया जाता है।
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