RPS-2020 CGPSC MAINS WRITING PRACTICE 17 MAY ANSWER

Angeshwar
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RPS-2020 CGPSC MAINS WRITING PRACTICE 17 MAY ANSWER


उत्तर1 दर्शन जीव जगत और ब्रह्म के प्रति चिंतन से प्राप्त ज्ञान है जबकि संस्कृति के भौतिक अभौतिक दोनों पक्ष मानव द्वारा निर्मित है। दोनों मानवीय ज्ञान पर आधारित है। इनके बीच निम्न सम्बन्ध है-
1) संस्कृति का निचोड़ दर्शन है जो संस्कृति की सभी विशेषताओं को दर्शाता है।
2) सांस्कृतिक चेतन दर्शन को परिपक्व बनाता है जैसे 19वी सदी का पुनर्जागरण।
3)दर्शन संस्कृति का मार्गदर्शक है।
4) दर्शन संस्कृति का संरक्षक है जैसे भारतीय संस्कृति भारतीय दार्शनिको के कारण सुरक्षित रहा।

स्प्ष्ट है कि दोनो में सम्बन्ध अखण्डनीय है। जहां दर्शन संस्कृति से अपना विषयवस्तु लेता है वही दर्शन सांस्कृतिक मूल्यों की विवेचना कर संस्कृति को समृद्ध व प्रभावशाली बनाता है


उत्तर 2 धर्म और दर्शन के बीच सम्बन्ध को अंतर समानता और परिपूरकता के स्तर पर देख सकते है, जैसे- अंतर के स्तर पर-
1) धर्म आस्था और विश्वास पर टिका है जबकि दर्शन तर्क बुद्धि और अनुभव पर।
2) धर्म आध्यातिमक भूख का परिणाम है जबकि दर्शन लौकिकवादी आग्रह से जुड़ता है ।
3) धर्म पक्षपाती हो सकता है लेकिन दर्शन नह।
4) धर्म का उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना है जबकि दर्शन का जीव जगत और ब्रह्म से जुड़े रहस्यो को खोजना।
समानता के स्तर पर-
1) दोनों परम् ज्ञान, परम सत्ता की खोज करता है
2) दोनो सकारात्मक मूल्यों से जुड़ता है
3) दोनों परलोक की सत्ता को स्वीकारता है।

वास्तविकता यह है कि धर्म दर्शन एक ही सिक्के के दो पहलू है, दोनी एक दूसरे से सीखता है, एक दूसरे को मजबूत करता है । जहाँ धर्म दर्शन को चिंतन का आधार देता है वही दर्शन धर्म की कमियों को उजागर करते है। इस प्रकार दोनों मानवता के लिए काम करते है।


उत्तर 3- भारतीय दर्शन और पश्चिमी दर्शन में अंतर


 

आधार

पश्चिमी दर्शन

भारतीय दर्शन

(1) अर्थ

पश्चिम में दर्शन फिलॉसॉफिया से बना है जिसका अर्थ ज्ञान के प्रति प्रेम या अनुराग है भारतीय दर्शन दृश् धातु से बना बना है जिसका अर्थ आर- पार देखना या ज्ञान की अनुभूति है

(2) उद्देश्य

यहाँ दर्शन साधन व साध्य दोनों है, भौतिक संतुष्टि मात्र है। यहां दर्शन साधन है, साध्य मोक्ष है।
आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए

(3)विकास/उदय

भौतिक चिंतन से जन्म लिया है यहाँ ब्राह्मणवादी वर्चस्व के विरोध में उत्पन्न हुआ है।

(4)स्वरूप

भौतिकवादी, सैद्धान्तिक, बुद्धिवादी और लौकिक है। ये आध्यात्मवादी, व्यवहारिक, अनुभववादी तथा अलौकिक है।

(5)विधियां

यह तर्कवादी, विज्ञानवादी व अनुसन्धानवादी है। ये अनुभववादी, चिंतनशील और विश्वास आधारित है।

(6)धर्म से सम्बन्ध

यह धर्मतटस्थ है। इनका उदय ही धर्म की व्याख्या से हुआ है।

(7)जीवन से जुड़ाव

यहां सीमित है, जीवन को नया रास्ता नही दिखाता है। यह जीवन से घनिष्ठ संबंध है। जीवन को नया रास्ता नही दिखाता है।

(8)अन्य

यह व्यक्तियों को बाँटता है, रेखीय है, व्यक्तिवादी है।
यह स्वतंत्र रहना चाहता है
यह व्यक्तियों को जोड़ता है, समूहवादी हौ, चक्रीय है तथा विश्व दर्शन के विकास की बात करता है
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